रांची: झारखंड के प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने 22 अक्टूबर से रांची में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। शिक्षक उन शिक्षकों के लिए अनिवार्य किए गए Teacher Eligibility Test (TET) के विरोध में प्रदर्शन करेंगे, जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 लागू होने से पहले हुई थी।
यह फैसला ऑल झारखंड प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। शिक्षक संगठन ने मांग की है कि झारखंड विधानसभा TET की अनिवार्यता से छूट देने की मांग को लेकर एक प्रस्ताव पारित करे और उसे केंद्र सरकार के पास भेजे।
करीब 25 हजार शिक्षक प्रभावित
शिक्षक संगठन के अनुसार, झारखंड में करीब 25 हजार शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के TET से जुड़े फैसले से प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने आशंका जताई है कि इस आदेश का असर शिक्षकों की सेवा जारी रहने पर पड़ सकता है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले के बाद सामने आया, जिसमें अदालत ने कहा था कि RTE अधिनियम के दायरे में आने वाले स्कूलों में शिक्षकों के लिए TET न्यूनतम योग्यताओं में से एक है। इसके बाद अदालत ने पात्र सेवारत शिक्षकों को यह योग्यता हासिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी।
विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने की मांग
शिक्षक संगठन ने झारखंड सरकार से तमिलनाडु का उदाहरण अपनाने की मांग की है, जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित शिक्षकों को राहत देने की मांग को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है।
संगठन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा है और अपनी मांगों को लेकर राज्य के मंत्रियों से मुलाकात करने की योजना बनाई है। शिक्षक चाहते हैं कि राज्य सरकार इस मामले में विधायी हस्तक्षेप करे, ताकि उनकी मांग को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जा सके।
रांची में प्रस्तावित भूख हड़ताल
शिक्षक संगठन ने कहा है कि वह राज्य सरकार के साथ बातचीत के जरिए मामले का समाधान निकालने की कोशिश जारी रखेगा। हालांकि, अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 22 अक्टूबर से रांची में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
प्रस्तावित आंदोलन से RTE अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता लागू किए जाने को लेकर चल रही बहस और तेज हो सकती है। देश के अन्य हिस्सों में भी शिक्षक संगठनों की ओर से इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन और राहत की मांग की गई है।
फिलहाल, शिक्षक संगठन भूख हड़ताल शुरू होने से पहले झारखंड सरकार से औपचारिक जवाब और विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की कार्रवाई की मांग कर रहा है।